क्या आपको पता है कि पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा एंटीबायोटिक्स दवाओं का सेवन कहां किया जाता है? जानकर आश्चर्य होगा कि भारत में सर्वाधिक करीब 1300 करोड़ एंटीबायोटिक्स पिल्स प्रतिवर्ष प्रयोग में ली जाती हंै। चीन में 1000 करोड़, वहीं अमरीका में यह आंकड़ा 700 करोड़ सालाना है। वल्र्ड एंटीबायोटिक्स रिपोर्ट 2015 में ये खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक एंटीबायोटिक्स के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल से भारत में लोगों की रोगप्रतिरोधक क्षमता पर भी बुरा असर पड़ा है। देश के लोगों ने इतनी एंटीबायोटिक ले ली हैं कि उनके शरीर में रेजिस्टेंट पैदा होने से अब एंटीबायोटिक्स ने काम करना बंद कर दिया है। ऐसे में छोटी-छोटी परेशानियां बड़ी समस्याओं का रूप ले रही हैं।
समस्या का पता लगने पर ही लें
मेडिकल साइंस के अनुसार एंटीबायोटिक केवल उन्हीं रोगों में दी जानी चाहिए, जो बैक्टीरिया या अन्य परजीवी (वायरस के अलावा) के कारण होते हैं। देश में 80 फीसदी संक्रामक रोग वायरस से होते हैं। ऐसे में एंटीबायोटिक की जरूरत ही नहीं होती। वायरस से होने वाले रोगों में एंटीबायोटिक देना वाकई खतरनाक है। इसके अधिक प्रयोग से शरीर में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया भी खत्म हो जाते हैं और शरीर जल्दी-जल्दी संक्रमण की चपेट में आने लगता है। बिना जरूरत के एंटीबायोटिक की हैवी डोज देने से शरीर में रेजिस्टेंट बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। इन पर किसी भी तरह की एंटीबायोटिक का असर नहीं होता।
बैक्टीरिया और वायरस में अंतर
बैक्टीरिया सजीव होते हैं। ये अच्छे और बुरे दोनों तरह के पाए जाते हैं। बुरे बैक्टीरिया शरीर में रोग पैदा करते हैं। जरूरत से ज्यादा एंटीबायोटिक इस्तेमाल करने से अच्छे बैक्टीरिया भी खत्म हो सकते हैं। निमोनिया, साइनस इन्फेक्शन, ब्रॉन्काइटिस और स्किन इन्फेक्शन बैक्टीरिया की वजह से होते हैं। डॉक्टर की सलाह से एंटीबायोटिक लें। सामान्य सर्दी, एलर्जी, फ्लू जैसी परेशानियां वायरस के कारण होती हैं। वायरस पर एंटीबायोटिक का असर नहीं होता। इसलिए इनका सेवन नहीं करना चाहिए।
मेटाबॉलिज्म असंतुलित
शोधकर्ताओं के मुताबिक एंटीबायोटिक्स से पेट में बैक्टीरिया की संख्या व उसका स्वरूप बदल जाता है। इसका लगातार प्रयोग करने से मेटाबॉलिज्म असंतुलित हो जाता है। एंटीबायोटिक्स की वजह से अच्छे बैक्टीरिया की संख्या कम हो जाती है व खराब बैक्टीरिया की संख्या बढऩे से पेनक्रियाज का संतुलन बिगड़ जाता है और डायबिटीज का खतरा बढऩे लगता है।
लग सकती है रोक
सरकार सेहत के साथ खिलवाड़ को रोकने के प्रयासों के तहत संक्रामक बीमारियां जैसे मलेरिया, टीबी आदि में एंटीबायोटिक दवाओं के लिखने व बिक्री पर जल्द ही प्रतिबंध लगा सकती है। चिकित्सकों व दवा विक्रेताओं को कुछ वैधानिक कानूनों को मानना पड़ेगा। ये दिशा-निर्देश जल्द ही लागू किए जाने की सम्भावना है।
डायबिटीज का खतरा
बुखार, खांसी या जुकाम होने पर एंटीबायोटिक्स से परहेज करना चाहिए। इनका बार-बार इस्तेमाल करने से डायबिटीज का खतरा 53 फीसदी तक बढ़ जाता है। अमरीका की यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन के सेंटर फॉर डायबिटीज रिसर्च में यह स्टडी की गई है। दुनियाभर में सबसे ज्यादा डायबिटीज के मरीज भारत में हैं। ऐसे में हमें एंटीबायोटिक्स पर काफी गंभीरता से विचार करना होगा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आगाह किया है कि एंटीबायोटिक्स के ज्यादा इस्तेमाल से दवाओं के प्रति प्रतिरोध बढ़ रहा है जिससे इलाज विफल हो रहे हंै। यह प्रतिरोध जटिल सर्जरी और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के प्रबंधन को भविष्य में ज्यादा मुश्किल बना सकता है। ऐसे में भारत और साउथ-ईस्ट एशियाई देश के लोगों की सेहत के सामने मौजूद इस खतरे पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।
इन बातों का रखें खयाल
घर में एंटीबायोटिक दवाएं रखने से परहेज करें। कोई भी दवा विशेषज्ञ की सलाह से ही लें। डॉक्टर से एंटीबायोटिक के बारे में सारी शंकाओं का समाधान करा लें। एक्सपायरी दवा का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। अपने पास रखी पुरानी पर्ची पर लिखी गई दवाओं को अपनी मनमर्जी से न लें।
विशेषज्ञ की राय
एंटीबायोटिक के प्रयोग को कम करने के लिए प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखना जरूरी है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम व पर्याप्त पानी पीने जैसी आदतें अपनाकर इसके प्रयोग को कम कर सकते हंै। हर रोग में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती इसलिए कोई भी दवा डॉक्टरी परामर्श से ही लें।
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