पेट की महाधमनी में रुकावट से लकवे की स्थिति, सर्जरी से ठीक

दातारामगढ़ (सीकर) के 56 वर्षीय मरीज को कई वर्षों से हार्ट की समस्या थी। करीब छह माह पहले हृदय में तेज दर्द होने पर परिजनों ने सीकर में डॉक्टर को दिखाया। जांच के बाद चिकित्सकों ने इनकी एंजियोप्लास्टी की। इसके बाद वे स्वस्थ हो गए, लेकिन एक दिन उनके दोनों पैर ने काम करना बंद कर दिया। जांच में पाया कि पैरों में लकवे की स्थिति है और हार्ट से खून निकल रहा है। खून पेट में भर रहा है। यह स्थिति महाधमनी यानी डिस्टल एब्डोमिनल एओर्टा में क्लॉटिंग के कारण हुई थी। इसको लेकर मरीज को काफी परेशानी हो रही थी. कई डॉक्टर्स ने कह दिया था कि इस स्थिति में मरीज का बचना मुश्किल है. इसके बाद परिजन जयपुर लेकर आये और डॉ. समीर को दिखाया

जांच के तुरंत बाद मरीज की दो सर्जरी की गई। पैरों में खून की सप्लाई शुरू करने के लिए पैरों की धमनियों की सर्जरी हुई। फिर फटे हार्ट को ठीक करने के लिए रिपेयर ऑफ स्यूडोएन्यूरिज्म सर्जरी की गई। दोनों सर्जरी सफल रही। अगले दिन से मरीज सामान्य होने लगा। एक सप्ताह बाद मरीज को डिस्चार्ज कर दिया गया। डॉ. समीर शर्मा ने बताया कि फटे हार्ट की सर्जरी जोखिम भरा होता है। इसके आधे मरीजों की मौत सर्जरी के दौरान हो जाती है। खून निकलने से ब्लड क्लॉट के ब्रेन में पहुंचने से भी मरीज की मौत हो जाती है। इसमें इंफेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है और हार्ट इतना कमजोर हो जाता है कि सर्जरी के बाद टांके नहीं लगते हैं. लेकिन इस मरीज में परेशानी तो हुई पर उसकी जान बच गई। सर्जरी में डॉ. मुकेश गर्ग एवं डॉ. अजय शर्मा भी शामिल थे। इस जटिल ऑपरेशन को डॉ. समीर शर्मा के साथ डॉ. मुकेश गर्ग एवं डॉ. अजय शर्मा ने किया।
डॉ. समीर शर्मा,
हार्ट सर्जन, फोर्टिस हॉस्पिटल, जयपुर

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