पुरूषों की ये समस्या हो सकती है जानलेवा, न करें लापरवाही

नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ रही प्रोस्टेट ग्रंथि कैंसर की समस्याओं को नियंत्रित करने के लिए विशेषज्ञों ने प्रारंभिक चरण में इसका निदान करने और बीमारी का इलाज के लिए टारगेटेड या स्मार्ट स्क्रीनिंग किये जाने की सलाह दी है।
वर्धमान महावीर चिकित्सा महाविद्यालय (वीएमएमसी) एवं सफदरजंग हॉस्पिटल के यूरोलॉजी और रीनल ट्रांसप्लांट विभाग के प्रमुख प्रोफेसर अनूप कुमार ने मंगलवार को बताया कि कई पुरुषों में उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट ग्रंथि के विकसित होने की समस्या देखने को मिलती है क्योंकि इस ग्रथि का विकास लगातार होता रहता है। पुरुषों को बढ़ती उम्र के साथ प्रोस्टेट कैंसर की जांच करने के लिए नियमित प्रोस्टेट स्क्रीनिंग करवानी चाहिए।

पश्चिमी देशों की तुलना में भारत में उम्र-आधारित पीएसए रेंज काफी कम है। भारत में प्रोस्टेट कैंसर का निदान अभी भी बाद के चरणों में शुरू होता है जबकि पश्चिमी देशों में यह पहले शुरू हो जाता है। उन्होंने कहा कि प्रोस्टेट बढ़ने के मामले बढ़ रहे हैं और इनकी वजह कैंसर नहीं है। इन्हें बेनिन प्रोस्टैटिक हाइपरप्लासिया (बीपीएच) और प्रोस्टेट कैंसर (पीसीए) कहा जाता है, जो भारतीय स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं। प्रोस्टेटाइटिस और बीपीएच आम प्रोस्टेटिक बीमारियां हैं जो दुनियाभर में लाखों पुरुषों को अपना शिकार बना रही हैं। बीपीएच प्रोस्टेट कैंसर नहीं है और यह इसके होने का कारण भी नहीं बनता है लेकिन यह लोगों के प्रोस्टेट स्वास्थ्य को प्रभावित करता है और आगे चलकर जटिलताओं का कारण बन सकता है।
उन्होंने कहा कि कैंसर प्रोजेक्शन डाटा के



अनुसार वर्ष 2020 तक इन मामलों की संख्या दोगुनी हो जाएगी। दिल्ली कैंसर रजिस्ट्री के अनुसार प्रोस्टेट कैंसर दिल्ली में पुरुषों के बीच दूसरा सबसे ज्यादा पाये जाने वाला कैंसर है। प्रोस्टेट ग्रंथि से निकलने वाले तरल पदार्थ के अभाव यौन अक्षमता भी हो सकती है। समय रहते इस ग्रंथि की समस्या का उपचार कराना जरूरी है क्योंकि बढ़ी हुई प्रोस्टेट ग्रंथि से मूत्र उत्सर्जन में काफी दिक्कत आती है और मूत्राशय में मूत्र जमा होने के कारण यह गुर्दों के काम को प्रभावित करता है। शरीर में मूत्र जमा होने से यूरिया का असर घुटनों पर सबसे अधिक पड़ता है।

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