तंबाकू पहले दिल पर करता हमला फिर दूसरे अंगों पर असर

सिगरेट पीना और दूसरे तंबाकू उत्पादों को चबाना सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। बच्चे हों या बुजुर्ग वे जब तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं तो उसके हानिकारक तत्व खून के माध्यम से शरीर के महत्वपूर्ण अंगों में पहुंचकर उसके काम करने की क्षमता को खराब करते हैं। लंबे समय तक तंबाकू और सिगरेट में मिलने वाले हानिकारक तत्त्च जब शरीर के भीतरी अंगों को प्रभावित करते हैं तो कई तरह के जानलेवा घातक रोगों के होने का खतरा बढ़ जाता है। आगामी 31 मई को वल्र्ड नो टोबैको डे मनाया जाएगा जिसकी थीम इस बार ‘टोबैको एंड हार्ट डिजीज’ रखी गई है।

दिल की धडकऩ बढ़ाते केमिकल

तंबाकू और सिगरेट का जब कोई इस्तेमाल करता है तो दिल की धडकऩ बढ़ जाती है। सिगरेट या अन्य तंबाकू उत्पादों में करीब चार हजार तरह के केमिकल्स होते हैं। कार्बन मोनोऑक्साइड और टार जैसे जहरीले पदार्थ शरीर के भीतरी अंगों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति तंबाकू उत्पाद का प्रयोग करता है उसमें मिले केमिकल्स हृदय तक पहुंचता है जो खून में मिलकर दिमाग और फिर शरीर के दूसरे अंगों में फैलता है। इसके बाद व्यक्ति कुछ पल के आराम महसूस करता है लेकिन जहर अपना काम कर चुका होता है जिसके परिणाम लंबे समय बाद हार्ट अटैक, आर्टरी ब्लॉकेज के तौर पर सामने दिखते हैं। तंबाकू उत्पादों के इस्तेमाल से मुंह, फेफड़े, गले, अग्नाशय, यूरिनरी ब्लैडर कैंसर के होने वाले कारकों में शामिल है।

इच्छाशक्ति से छूटेगी नशे की तलब

सिगरेट और तंबाकू की तलब को छोडऩे के लिए व्यक्ति के भीतर मजबूत इच्छाशक्ति का होना बहुत जरूरी है। तंबाकू और सिगरेट के इस्तेमाल से मुक्ति के लि 90 फीसदी दृढ़ इच्छाशक्ति जबकि 10 फीसदी दवाओं और काउंसिलिंग की जरूरत होती है। व्यक्ति जब मन में ठान ले कि उसे तंबाकू या सिगरेट का नशा छोडऩा है तो उसे अपने परिवार और दोस्तों के सामने कबूल करना होगा कि वे नशे की लत को छोड़ रहा है। अगर वे कभी सिगरेट या दूसरे तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल करते पाया गया तो उसे ऐसा करने से रोकेंगे और उसे उसकी बात याद दिलाएंगे। जो लोग ऐसा नहीं करते हैं वे सिगरेट या अन्य तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल छोडऩे के एक साल के भीतर दोबारा शुरू कर देते हैं।

नशे की ‘तलब’ छोडऩे पर तीन महीने तकलीफ

नशे की लत छोडऩे पर तीन महीने तकलीफ होती है। इसमें व्यक्ति को बेचैनी के साथ बहुत अधिक गुस्सा आना, घबराहट, चिड़चिड़ेपन के साथ तनाव और अकेले की इच्छा होने लगती है। इस तकलीफ से बचाने के लिए रोगी को निकोटीन का प्रयोग डॉक्टरी सलाह पर दवा की तरह करने को कहा जाता है जिससे उसकी परेशानी कम हो सके। कई बार व्यक्ति नशे की तलब में इतना तड़पने लगता है कि उसकी मानसिक स्थिति खराब हो जाती है और बेहोश होने लगता है। ऐसे मामलों में सावधानी बरतनी चाहिए और रोगी को तुरंत नजदीक के अस्पताल ले जाना चाहिए।

कश लगाने की आदत बहुत खराब

हुक्का बार में मिंट फ्लेवर का कश लगाने का प्रचलन तेजी से बढ़ा है। हुक्का बार से शुरू हुई कश लगाने की आदत सिगरेट, सिगरेट और दूसरे नशे जिसमें कश लगाने की जरूरत होती है व्यक्ति उसका आदि हो सकता है। बच्चे अगर हुक्का बार जा रहे हैं और इसकी जानकारी है तो उन्हें रोकना चाहिए क्योंकि दोस्तों के साथ शुरू हुई उनकी ये मौज मस्ती उन्हें भविष्य में बड़ी परेशानी में डाल सकती है।

नशे की लत को ऐसे छुड़ाते

नशे की लत को छुड़ाने के लिए निकोटीन रिप्लेसमेंट थैरेपी का प्रयोग करते हैं। इसमें एक छोटी सी पट्टी स्टीकर व्यक्ति के हाथ या पीठ पर लगाते हैं। पैच व्यक्ति के शरीर में निकोटीन की छोटी खुराक पहुंचा नशे की लत को कम करने में मदद करता है। निकोटीन गम जिन्हें तंबाकू चबाने की लत होती है उसकी लत को कम करने में प्रयोग किया जाता है। निकोटीन-स्प्रे और इन्हेलर भी तंबाकू उत्पादों के इस्तेमाल से बचाने में मदद करता है। कुछ रोगियों को ब्लड प्रेशर और अवसाद की दवाएं भी दी जाती हैं जिससे उन्हें बड़ी परेशानी से बचाया जा सके।

डॉ. रविंद्र गोठवाल, कैंसर रोग विशेषज्ञ, जयपुर
डॉ. ज्ञानदीप मंगल , श्वसन रोग विशेषज्ञ, दिल्ली

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